विश्वनाथ में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

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रामकथा: गंगा से ब्रह्मपुत्र तक  विषय पर विशेषज्ञ तथा शोधार्थी ने सारगर्भित व्याख्यान दिये

कृषि यंत्र प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान, उत्तर पूर्वी क्षेत्र के निदेशक पी कमलाबाई मुख्य अतिथि के रूप में समापन सत्र में शिरकत

विश्वनाथ, (असम) ll :  पूर्वोत्तर हिंदी साहित्य अकादमी  विश्वनाथ जिला इकाई एवं केंद्रीय समिति तथा विश्वनाथ चारिआलि राष्ट्रभाषा प्रबोध विद्यालय परिचालना समिति के सहयोग से सगुणमार्गी रामभक्ति काव्यधारा के लोकप्रिय महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी की जन्म दिनांक के अवसर पर दो दिवसीय कार्यक्रम के साथ राष्ट्रीय संगोष्ठी का कल कृषि यंत्र प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान,विश्वनाथ के सभागृह में संपन्न हुआ। संगोष्ठी का केंद्र बिंदु ‘रामकथा: गंगा से ब्रह्मपुत्र तक’ विषय पर विशेषज्ञ ,अतिथि वक्ताओं तथा शोधार्थियों ने दो दिवसीय व्याख्यान सत्र में श्रोताओं को प्रभावित किया‌।सर्वप्रथम रविवार को कृषि यंत्र प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान,विश्वनाथ में संगोष्ठी के तीसरा तथा चौथा सत्र का संयुक्त रूप से तेजपुर विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष व प्राध्यापक प्रो० अनंत कुमार नाथ के अध्यक्षता में आयोजित हुई जिसमें संगोष्ठी विशेषज्ञ के रूप में  राजीव गांधी विश्वविद्यालय , हिंदी विभाग के प्राध्यापक प्रो० अरुण कुमार पांडे, तेजपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के वरिष्ठ सहायक आचार्य डॉ० अनुशब्द, संगोष्ठी संरक्षण रीता सिंह सर्जना मौजूद थी। इस सत्र का प्रोफेसर आनंद कुमार मिश्रा ने  सरस्वती  माता और महाकवि तुलसीदास जी के सामने दीप प्रज्ज्वलित तथा श्रद्धा सुमन अर्पित करके  शुभारंभ किया। इस सत्र का संचालन कर रही सांगठनिक सचिव मनीषा पाल ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। इसके बाद अध्यक्ष,विशेषज्ञ तथा संरक्षक को फुलाम गामोछा से स्वागत किया गया। इसके बाद वरिष्ठ साहित्यकार हरि लुईटेल (उपाध्याय) ने  “लोकनायक तुलसीदास की समन्वय भावना”, विश्वनाथ महाविद्यालय के अध्यापिका गीता वर्मा ने  “रामचरित्रमानस के स्त्री पात्र”, दरंग कॉलेज राजीव गाँधी विश्वविद्यालय के शोधार्थी विक्रम कुमार, तेजपुर से ढुण्डिराज उपाध्याय ने  “विदेशों में श्री राम और रामायण: दक्षिण पूर्व एशिया के संदर्भ में” , राजीव गाँधी विश्वविद्यालय के शोधार्थी विक्रम कुमार, विश्वनाथ चारिआलि के समाजसेविका ऊषा गुप्ता ने अपना सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किया। विशेषज्ञों ने भी शोधार्थी के शोध विषय अपना मंतव्य प्रकट की। इस मौके पर प्रो० अरूण कुमार पाण्डेय ने “तुलसी के राम की प्रगतिशील चेतना” और डॉ० अनुशब्द ने “असमिया रामकथा के विविध आयाम” पर विचार व्यक्त किए। अंत में  अध्यक्ष प्रोफेसर कुमार अनंत ने सभी शोधार्थी को अपने विषय प्रस्तुत के लिए आभार जताते हुए और विशेषज्ञों को धन्यवाद दी। 

तत्पश्चात दोपहर भोजन अवकाश के बाद अपराह्न 2:30  बजे गरिमामय समापन सत्र का शुभारंभ होता है।संगोष्ठी संयोजक व पूहिंसाअ के जिला सचिव संतोष कुमार महतो द्वारा संचालित समापन सत्र के अध्यक्ष  रीता सिंह सर्जना,  अध्यक्ष पूर्वोत्तर हिंदी साहित्य अकादमी, विश्वनाथ चारिआलि राष्ट्रभाषा प्रबोध विद्यालय परिचालना समिति के अध्यक्ष प्रभुनाथ सिंह, दीप प्रज्जवलक  हेम कुमार गौतम  जिलाध्यक्ष, विश्वनाथ, असम नेपाली साहित्य सभा, मुख्य अतिथि  पी. कमलाबाई ,निदेशक कृषि यंत्र प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान, विश्वनाथ  , विशिष्ट अतिथि डॉ० विश्वजीत कुमार मिश्र ,सहायक आचार्य, हिंदी विभाग ,राजीव गांधी विश्वविद्यालय ,डॉ० भक्त प्रसाद गौतम,अध्यक्ष, विश्वनाथ नगर शाखा,असम नेपाली साहित्य सभा,  डॉ सरजीत दास, मुख्य मार्ग प्रमुख ,विश्वनाथ जिला, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को मंचासीन कराया गया। इसके बाद  अतिथियों को फुलाम गामोछा तथा फूल के गुलदस्ता से भव्य स्वागत किया गया।  इसके बाद जिलाध्यक्ष प्रेम विश्वकर्मा ने स्वागत भाषण दी ,जिसमें सभी अतिथियों का गर्म जोशी से स्वागत किया। इस मौके पर राष्ट्रीय संगोष्ठी के उपलक्ष में असम के पूर्व राज्यपाल गुलाबचंद्र कटारिया के द्वारा प्राप्त संदेश का कार्यकारी सदस्य वेददीप उपाध्याय ने पाठ तथा अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल  के. टी.पारनाईक द्वारा प्राप्त संदेश का  सांगठनिक सचिव मनीषा पाल ने पाठ कर सभी को साझा किया। इसके बाद विशिष्ट अतिथियों तथा मुख्य अतिथि ने भाषण दी। विशिष्ट अतिथि   डॉ० विश्वजीत कुमार मिश्र ने  तुलसी के काव्य में मनोविकार चिकित्सा पर व्याख्यान और डॉ० सरजीत दास ने वर्तमान जीवन में रामकथा की प्रासंगिकता के ऊपर व्याख्यान देते हुए राष्ट्र निर्माण के ऊपर काम करने के लिए सभी को आग्रह की। कार्यक्रम में उपस्थित दीपिका उपाध्याय ने समधुर भजन की प्रस्तुति से कार्यक्रम को चार चांद लगा दी। इसके बाद  संपूर्ण कार्यक्रम के संयोजक संतोष कुमार महतो ने दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी की रिपोर्ट और जिला अध्यक्ष प्रेम विश्वकर्मा ने स्वरचित  देशभक्ति गीत प्रस्तुति दी।  इस मौके पर फार्म मिशनरी संस्थान के पदाधिकारी तथा विश्वनाथ चारिआलि राष्ट्रभाषा प्रबोध विद्यालय परिचालना समिति के कार्यकरी अध्यक्ष सूर्यनारायण पांडे को फुलाम गामोछा से सम्मानित किया गया।अंत में सभी अतिथियों के कर कमलों से शोधार्थी तथा अध्यापक को प्रमाण पत्र वितरण किया गया । संगोष्ठी के संरक्षण तथा समापन सत्र के अध्यक्ष रीता सिंह सर्जन ने सभी को   महाकवि गोस्वामी तुलसीदास की जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उपस्थित अतिथि को आभार जताते हुए इस कार्यक्रम की सफलता के लिए विश्वनाथ जिला इकाई के सभी कार्यकर्ताओं को बधाई दी। पूहिंसाअ के कार्यकरी सदस्या व अध्यापिका गीता वर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन की। राष्ट्रगान से गरिमामयी समापन सत्र का भंग किया गया। इस संपूर्ण कार्यक्रम के संयोजक संतोष कुमार की भूमिका में हुई।उल्लेखनीय है कि 10 अगस्त को विश्वनाथ चारिआलि के राष्ट्रीय विद्यालय आमबाड़ी के सभागृह में प्रातः 10 बजे पहला सत्र एवं उद्घाटन सत्र का शुभारंभ हुआ। जिसमें पूर्वोत्तर हिंदी साहित्य अकादमी विश्वनाथ जिला इकाई के जिलाध्यक्ष प्रेम विश्वकर्मा के अध्यक्षता  और जिलासचिव संतोष कुमार महतो के संचालित आयोजित उद्घाटन सत्र में दीप प्रज्वलक के रूप में लोकनाथ शास्त्री, व्यवस्थापिका सदस्य,असम राष्ट्रभाषा प्रचार समिति ,मुख्य अतिथि के रूप में प्रभुनाथ सिंह, विश्वनाथ चारिआलि राष्ट्रभाषा प्रबोध विद्यालय परिचालना समिति, विशिष्ट अतिथि के रूप में हरि प्रसाद लुईटेल, गीता वर्मा, अध्यापिका, हिंदी विभाग, विश्वनाथ महाविद्यालय तथा सूर्यनारायण पांडे,कार्यकारी अध्यक्ष,विश्वनाथ चारिआलि राष्ट्रभाषा प्रबोध विद्यालय परिचालना समिति,विश्वनाथ मौजूद थे। पूर्वोत्तर हिंदी साहित्य अकादमी के पदाधिकारी तथा सदस्य- सदस्या ने फुलाम गामोछा से सम्मानित किया। इसके बाद दीप प्रज्वलक लोकनाथ शास्त्री ने दीप प्रज्ज्वलित करके दीप -मंत्र से गरिमामय संगोष्ठी का शुभारंभ किया। पूहिंसाअ विश्वनाथ जिला इकाई के सांगठनिक सचिव मनीषा पाल ने सरस्वती वंदना और स्वागत भाषण प्रस्तुति दी।उद्घाटन सत्र में उपस्थित दीप प्रज्वलक, अतिथि, मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों ने सगुणमार्गी काव्यधारा के महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी ‌ के जीवन पर सारगर्भित भाषण देते हुए रामकथा गंगा से ब्रह्मपुत्र तक और विश्व के हर जनमानस से संबंधित पर व्याख्यान दी। वरिष्ठ साहित्यकार हरि लुईटेल (उपाध्याय) ने गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरितमानस के ऊपर व्याख्यान देते हुए कहा तुलसीदास ने रामचरितमानस अमर काव्य विश्व को दान दिया और ज्ञान एवं भक्ति में समन्वय एक होते हुए भी भक्ति सर्वश्रेष्ठ है क्योंकि भक्ति मुक्ति प्रदान करती है। जब तक इस धरती में सनातन रहेंगे तब तक गोस्वामी तुलसीदास अमर रहेंगे। अतिथि सूर्यनारायण पांडे ने वर्तमान कलियुग में रामकथा की प्रासंगिक को जोड़ते हुए आध्यात्मिक ज्ञान पर बल दिये। अध्यक्षीय भाषण प्रेम विश्वकर्मा ने कहा महाकवि तुलसीदास ने रामकथा के जरिये पूरे विश्व को जोड़ा है।  रामकथा: गंगा से ब्रह्मपुत्र तक पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी से जनमानस तथा शोधार्थी प्रभावित होंगे। उपस्थित महानुभावों की सराहना की। राष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक तथा पूहिंसाअ विश्वनाथ जिला इकाई के जिला सचिव संतोष कुमार महतो ने उपस्थित अतिथि को धन्यवाद ज्ञापन की। स्वागत किया गया। इसके बाद राष्ट्रगान से उद्घाटन सत्र का समाप्ति हुई। इस मौके पर सांगठनिक सचिव मनीषा पाल, समानंद रौनियार, डोली दास घोष,आरती पाल,लखी पाल आदि गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे । उद्घाटन सत्र के बाद दूसरे सत्र का शुभारंभ ऑनलाइन माध्यम से हुआ।

जिसमें संगोष्ठी संरक्षक  के रूप में रीता सिंह सर्जना, अध्यक्ष, पूर्वोत्तर हिंदी साहित्य अकादमी , बीज वक्ता के रूप में  डॉ. वीर कुँवर सिंह मार्तण्ड, साहित्यकार, कोलकाता ,अध्यक्ष के रूप में डॉ. भगवान स्वरूप चैतन्य, अध्यक्ष ग्वालियर साहित्य संस्थान, ग्वालियर, विशेषज्ञ के रूप में क्रमशः प्रो. स्नेहलता नेगी, दिल्ली विश्वविद्यालय, प्रो. सरोज कुमारी, विवेकानंद कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय मौजूद थे। इस ऑनलाइन दूसरे सत्र में कार्यपत्र प्रस्तुत के रूप में क्रमशः  सुनाली बरगोहाँई,  कीर्तिका दुबे,हिमांशु सक्सेना ,डॉ. अर्चना हाजारिका,  सुशीला बाई,   स्मृति रेखा मल्लिक, अन्नपूर्णा बाजपेयी,  सुदक्षिणा दुवारी,कल्पना शइकीया, डॉ. नंदिता दत्त, पल्लवी दास ने शोध सारांश पेश की। इस ऑनलाइन दूसरा सत्र का कुशल संचालन  डॉ. गोमा देवी शर्मा, सहायक आचार्या, हिंदी विभाग, तेजपुर विश्वविद्यालय ने की।