


रचनाकारों का हुआ सम्मान
कवि, लेखकों ने व्यक्त किए उद्गार
प्रयागराज। आज रविवार को लोक रंजन प्रकाशन की ओर से पुस्तक विमोचन एवं सम्मान समारोह का एक कार्यक्रम केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय गंगानाथ झा परिसर में किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रोफेसर ललित कुमार त्रिपाठी, विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर रवि मिश्र, प्रोफेसर अशोक पाण्डेय व डॉक्टर अशोक शुक्ल, लोकरंजक प्रकाशक के संरक्षक पी सी पांडेय की उपस्थिति सम्मानीय रही। कार्यक्रम के पूर्व अतिथियों ने माँ वाणी के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन व पुष्प समर्पित करके साक्षी बनाया। प्रियम पांडेय की माँ वाणी की वंदना के साथ कार्यक्रम ने मूर्त रूप लिया। सुधा मिश्रा ने संस्कृत गीतम् प्रस्तुत कर तमाम तालियाँ बटोरी। इस अवसर पर मंचस्थ अतिथियों का अंगवस्त्रम से सम्मान किया गया।
सुर्ख गुलमोहर की रचनाकार सुनीता त्रिपाठी, मिली श्रीवास्तव की आधार मेरी पहचान, रामजीत मिश्र का भजन संग्रह विनय प्रसून और रंजन पांडेय की पुस्तक कोटा फीवर का विमोचन हुआ।
इस अवसर पर श्रीप्रकाश मिश्र की अनूदित रचना, महेन्द्र प्रसाद शुक्ल की लाॅकडाउन का लोकतंत्र, बजरंग प्रसाद की गीता का काव्यानुवाद, जनार्दन प्रसाद अस्थाना की गीत बनी बाउल, श्रीराम मिश्र तलब जौनपुरी की कभी खुल क्यों नहीं जाते, उमेश श्रीवास्तव का उपन्यास गुनई, शिवराम मुकुल मतवाला का मतवालों की मधुशाला, प्रोफेसर मिथलेश कुमार त्रिपाठी की छंदाजलि, गिरीश श्रीवास्तव की गिरीश के मुक्तक, भरत सोमैय्या की मेरे इस दिल में, आशिक जौनपुरी की मुहब्बत करके देखो, विजय लक्ष्मी विभा की अपनी अपनी भूल, डाक्टर स्नेह सुधा का प्रणय गीत, पूर्णिमा की पूर्णिमाञ्जलि, रामजीत मिश्र की खुश रहना मुहाल है, प्रोफेसर अरुण कुमार मिश्र की भारतीय संस्कृति में राम, सीमा वर्णिका की कहे वर्णिका आज, सुनीता त्रिपाठी की सुर्ख गुलमोहर, अवधेश श्रीवास्तव की सृजन के फूल, मिली संजय श्रीवास्तव की आधार मेरी पहचान, नीलम यादव की पूर्णिका संग्रह, गीता सिंह की कोठ की बांस, पंडित राकेश मालवीय मुस्कान की नव दोहा कलश, आदित्य गुप्त की भावनाओं के रंग, रचना सक्सेना की किसकी रचना, सुरेन्द्र नाथ की ऊँघ रहा है बरगद, रामसुख यादव की दरकती पहाड़ी सिसकते आदिवासी, उपन्यासकार रंजन पांडेय की कोटा फीवर, कांति पांडेय की आध्यात्मिक सूत्र, डिजाइनर ब्रह्मानंद मिश्र, संजीव गुप्त, अश्विन पांडेय, पीसी पांडेय को उनकी कृतियों पर शाल ओढ़ाकर, प्रतीक चिह्न तथा प्रमाणपत्र प्रदान करके सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर कवियों ने अपनी पुस्तक पर विचार व्यक्त करते हुए एक-एक रचना का पाठ किया।
विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर रवि मिश्र ने कहा कि साहित्यकार केवल समाज का चित्रण नहीं करता वरन वह अपने समाज को जीने की कला सिखाता है।
अशोक शुक्ल ने कहा कि जिस तरह अभिनेता कई चरित्र को जीवित करता है, लेखक भी उद्बोधन करता है।
प्रोफेसर अशोक पाण्डेय ने समकालीन विषय जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर लेखन की आवश्यकता पर जोर दिया।
मुख्य अतिथि ललित त्रिपाठी ने संस्कृत साहित्यकार मम्मट के मंगलाचरण से शुरू किया। उन्होंने कहा कि जीव मात्र को जीने का अधिकार हो जैसे विषय पर लिखें। लोक व्यथा पर लिखना ही लोक कवि होना कहलाता है।
कार्यक्रम का संचालन प्रकाशक व लेखक रंजन पांडेय ने किया। धन्यवाद ज्ञापन पी सी पांडेय ने किया।























