



प्रतप गढ़ ब्यूरो
पुत्र प्राप्ति और उनके दीर्घायु होने की कामनाओ के साथ शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक महिलाओं ने बड़े उत्साह और हर्षोल्लास के बीच कहीं डी जे तो कहीं बैंड बाजे के साथ कहीं नदी तो कहीं पोखरों के किनारे छठमाता के पूजन हेतु इकठ्ठा देखी गयी। व्रती महिलाओं ने बताया कि जिसकी मन्नते पूर्ण हो जाती है वे लोग बाजे गाजे के साथ पूजन स्थल तक पहुँचती है।ऐसी मान्यता है कि छ्ठी माता का प्राकट्य पोखरे से हुआ था। इस दिन व्रती महिलाए पूरे आस्था और विश्वास के साथ उपवास रख कर नदी और तालाब के किनारे ढांख और कुश एक चबूतरे पर स्थापित कर पूजन कर मंगल गीत गाती हैं। इस दिन व्रती स्त्रियां खेत में पैर नहीं रखती और न ही खेत की उपजी हुई वस्तु का सेवन ही करेंगी ।इस व्रत का मुख्य प्रसाद महुवा का फूल, भैंस का दूध दही और तिन्नी का चावल माना गया है। जिसका प्रसाद स्वरूप व्रती महिलाए सेवन करती है।























