
प्रयागराज, । मध्य प्रदेष के निमाड़ अंचल का देव प्रबोधिनी एकादषी से षुरू होने वाला काठी नृत्य, छिंदवाड़ा के भारिया जनजाति का भवम नृत्य बुन्देलखण्ड की पारम्परिक पर आधारित देवी गीत दिवारी नृत्य हास्य लोकगीत एवं देषी राई नृत्य की प्रस्तुतियों ‘‘लोक पर्व‘‘ की सांस्कृतिक में उपस्थित दर्षकों का भरपूर मनोरंजन किया।
मध्य प्रदेष संस्कृति विभाग द्वारा संगम की रेती के सेक्टर 7 में अयोजित ‘‘लोकपर्व‘‘ की सांस्कृतिक संध्या का श्रीगणेष भोपाल की सुलेखा भट्ट की गंगा स्तुति ‘‘चलो मन गंगा यमुना तीर‘‘ से हुआ। षंकर भण्डार खोले, सांवरे अई जइयों आदि भजनों ने उपस्थित तीर्थ यात्रियों को भक्ति रस में ओत-प्रोत कर दिया।
निमाड़ अंचल की प्रसिद्ध परम्परागत लोकनृत्य काठी जो देव एकादषी से षुरू होकर लगातार तीन महीने तेरह दिन तक चलता है तथा महाषिवरात्रि को षिवाभिशेक के बाद समाप्त होता है की प्रस्तुति, बुन्देलखण्ड का तमूरा भजन, ख्याल दादरा, गारी, कांगडा नृत्य चौकड़िया आदि की प्रस्तुतियॉं तथा भरिया जनजाति का कार्तिक पूर्णिमा से बैषाख माह तक होने वाला भड़म नृत्य ने भी तीर्थयात्रियों व उपस्थित जनसमूह को भरपूर आनन्दित किया।























