घुसपैठ केस में ED का बड़ा वार: 4 राज्यों में छापेमारी, लाखों कैश और सोना बरामद

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बांग्लादेशियों और रोहिंग्या की भारत में घुसपैठ से जुड़े धनशोधन मामले की जांच के तहत बृहस्पतिवार को चार राज्यों में कई ठिकानों पर छापेमारी की, जिनमें पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाके भी शामिल हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि संघीय एजेंसी विशेष तौर पर एक ऐसे गिरोह की गतिविधियों की जांच कर रही है जो विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) के तहत पंजीकृत लोक परमार्थ न्यास के जरिये काम करता है और इसे ब्रिटेन की कुछ संस्थाओं से चंदा मिला था।

पुस्तकालय से करीब 40 लाख रुपये नकद बरामद 
उन्होंने बताया कि संघीय एजेंसी के लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय ने धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत उत्तर प्रदेश के सहारनपुर (देवबंद), दिल्ली के जामिया नगर, हरियाणा के बल्लभगढ़ (फरीदाबाद ज़िला) और पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना, उत्तर 24 परगना और मुर्शिदाबाद में लगभग 13 जगहों पर छापेमारी की। अधिकारियों ने बताया कि पश्चिम बंगाल के कलीलकापुर स्थित हरोरा अल-जामियातुल इस्लामिया दारुल उलूम के कार्यालय और पुस्तकालय से करीब 40 लाख रुपये नकद तथा 180 ग्राम वजन के सोने के सिक्के बरामद किए गए। ईडी द्वारा 2024 में दर्ज मामला उत्तर प्रदेश आतंकवाद-रोधी दस्ते (यूपी-एटीएस) की प्राथमिकी पर आधारित है। 

जाली भारतीय पहचान दस्तावेज़ बनाने का आरोप 
यूपी-एटीएस की प्राथमिकी एक ऐसे संगठित गिरोह के बारे में है, जिसपर रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को भारत में गैर-कानूनी तरीके से दाखिल कराने, उनके लिए आधार, पैन और पासपोर्ट जैसे जाली भारतीय पहचान दस्तावेज़ बनवाने तथा देश के अलग-अलग हिस्सों में उनके बसने में मदद करने का आरोप है। उन्होंने बताया कि एटीएस की जांच में ‘एक जटिल’ वित्तीय नेटवर्क का खुलासा हुआ, जिसमें कुछ परमार्थ न्यास और संस्थाएं शामिल हैं, जिनपर कथित तौर पर विदेशी चंदा प्राप्त करने और अवैध गतिविधियों को संचालित करने में मदद के लिए कई बैंक खातों, बिचौलियों के खातों और जटिल लेनदेन के जरिये राशि स्थानांतरित करने का आरोप है।

ईडी को आशंका, भारत में बसने में मदद के बहाने ली गई रकम 
ईडी को आशंका है कि संदिग्ध लोगों को भारत में बसने में मदद करने के लिए छह हजार, आठ हजार और 10 हजार रुपये की छोटी-छोटी किस्तों में पैसे अंतरित किए गए। अधिकारियों का दावा है कि धनशोधन के जरिये जुटाए गए पैसे का मुख्य इस्तेमाल घुसपैठियों के आर्थिक पुनर्वास के लिए किया गया, ताकि उन्हें भारत में स्थायी रूप से बसाया जा सके। ईडी को आशंका है कि पश्चिम बंगाल के कुछ सीमावर्ती जिलों में एक समूह रोहिंग्या और बांग्लादेशियों को भारत में घुसपैठ करने में मदद कर रहा था।

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