सऊदी अरब ने हूतियों  के खिलाफ बदली सैन्य रणनीति, मिसाइलों के बजाय सस्ते स्काईवास्प से शुरू किए अटैक

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सऊदी अरब ने हूतियों  के खिलाफ बदली सैन्य रणनीति, मिसाइलों के बजाय सस्ते स्काईवास्प से शुरू किए अटैक

Dubai: सऊदी अरब ने यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव के संकेत दिए हैं। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि साना में हमले के दौरान ‘स्काईवास्प’ नाम के कामिकेज ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। यह हथियार अपने लक्ष्य से टकराकर खुद नष्ट हो जाता है। इसकी कम लागत और लंबी दूरी को देखते हुए इसे पश्चिम एशिया में बदलती ड्रोन युद्ध रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, हमले और ड्रोन की क्षमताओं से जुड़े कुछ दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ लंबे समय से संघर्ष कर रहा सऊदी अरब अब अपेक्षाकृत कम लागत वाले ड्रोन जैसे हथियारों पर अधिक जोर देता दिखाई दे रहा है। हूती भी ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल सऊदी ठिकानों तथा लाल सागर क्षेत्र में जहाजों को निशाना बनाने के लिए करते रहे हैं। ऐसे में महंगी वायु रक्षा मिसाइलों से हर छोटे ड्रोन का मुकाबला करना सैन्य दृष्टि से महंगा पड़ सकता है। इसी वजह से कामिकेज ड्रोन को कम लागत में लंबी दूरी तक हमला करने वाले विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

क्या है ‘स्काईवास्प’?
रिपोर्टों के मुताबिक, SKYWASP एक लंबी दूरी का कामिकेज ड्रोन है। कामिकेज ड्रोन ऐसे मानवरहित विमान होते हैं जिन्हें लक्ष्य तक पहुंचाकर उसी से टकरा दिया जाता है। लक्ष्य पर हमला करने के बाद ड्रोन खुद भी नष्ट हो जाता है। ‘स्काईवास्प’ नाम अंग्रेजी शब्द Wasp यानी ततैया से जुड़ा है। इसकी त्रिकोणीय संरचना और लक्ष्य पर झपटने की क्षमता को इसी नाम से जोड़ा जा रहा है। हालांकि, इसे ईरान के शाहिद-136 की सीधी नकल बताने वाले दावों को सावधानी से देखना जरूरी है। दोनों तरह के हथियारों में कामिकेज ड्रोन की समानताएं जरूर बताई जाती हैं, लेकिन डिजाइन और तकनीकी विशेषताओं की स्वतंत्र पुष्टि अलग विषय है।

35 हजार डॉलर कीमत का दावा-उपलब्ध रिपोर्ट में स्काईवास्प की कीमत करीब 35 हजार डॉलर और इसकी अधिकतम दूरी लगभग 1,500 किलोमीटर बताई गई है। यदि ये आंकड़े सही हैं, तो लंबी दूरी और कम लागत का संयोजन इसे सैन्य रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण बना सकता है। ऐसे हथियारों की खासियत यह होती है कि इन्हें बड़ी संख्या में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे दुश्मन की वायु रक्षा प्रणाली पर एक साथ कई दिशाओं से दबाव बनाया जा सकता है। हालांकि, किसी हथियार की वास्तविक प्रभावशीलता केवल उसकी कीमत और रेंज से तय नहीं होती। नेविगेशन, लक्ष्य पहचान, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, मौसम और दुश्मन की वायु रक्षा जैसे कई कारक भी महत्वपूर्ण होते हैं।

सऊदी-अमेरिकी कंपनी से जुड़ा है प्रोजेक्ट-रिपोर्टों में स्काईवास्प को SR2Vector से जोड़ा गया है, जिसे सऊदी अरब और अमेरिका से जुड़ा संयुक्त उपक्रम बताया गया है। सऊदी अरब अपनी रक्षा जरूरतों में घरेलू उत्पादन बढ़ाने और विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम करने की दिशा में लंबे समय से काम कर रहा है। यह प्रयास सऊदी अरब के विजन 2030 के व्यापक आर्थिक और औद्योगिक कार्यक्रम से भी जुड़ा है। रक्षा उद्योग में स्थानीय उत्पादन बढ़ाना इस नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

हूतियों के खिलाफ ड्रोन से ड्रोन का मुकाबला-हूती विद्रोहियों ने पिछले वर्षों में ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल सऊदी अरब तथा लाल सागर क्षेत्र में हमलों के लिए किया है। ऐसे में सऊदी अरब का कम लागत वाले कामिकेज ड्रोन पर जोर देना युद्ध की बदलती प्रकृति को दिखाता है। महंगी लड़ाकू मिसाइलों के मुकाबले अपेक्षाकृत सस्ते ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल युद्ध का आर्थिक गणित भी बदल सकता है। खासकर तब, जब एक हमले में कई ड्रोन एक साथ भेजे जाएं।

ड्रोन का इस्तेमाल अब केवल बड़ी सैन्य शक्तियों तक सीमित नहीं है। रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर पश्चिम एशिया तक छोटे और अपेक्षाकृत सस्ते ड्रोन ने आधुनिक युद्ध की रणनीति को काफी प्रभावित किया है।यमन में भी ड्रोन पहले से संघर्ष का हिस्सा रहे हैं। अब यदि सऊदी अरब अपने घरेलू या संयुक्त रूप से विकसित कामिकेज ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ाता है, तो यह क्षेत्र में ड्रोन आधारित हमलों और जवाबी हमलों की प्रतिस्पर्धा को और बढ़ा सकता है। साना में कथित स्काईवास्प हमले को लेकर सबसे अहम सवाल यह है कि इस हथियार का इस्तेमाल भविष्य में कितने बड़े पैमाने पर होता है। यदि लंबी दूरी और कम लागत से जुड़े दावे सही साबित होते हैं, तो सऊदी अरब के लिए यह हूती ठिकानों के खिलाफ एक अतिरिक्त विकल्प बन सकता है।

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