सभी के संयुक्त प्रयास से हिन्दी की लोकप्रियता बढ़ी- डॉ शीला सिंह

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हिन्दी दिवस पर गोष्ठी एवं कवि गोष्ठी आयोजित

मिर्जापुर। हिन्दी दिवस पर स्वामी विवेकानन्द शिक्षा समिति के तत्वावधान में नगर के बुन्देलखण्डी मोहल्ले में विचार गोष्ठी एवं कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य अतिथि ज्ञानन्दा एकेडेमी की डायरेक्टर डॉ शीला सिंह थी। अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार गणेश गम्भीर ने की। अपने वक्तव्य में डॉ शीला सिंह ने कहा कि आज हिन्दी की लोकप्रियता इसलिए बढ़ी है क्योंकि सभी क्षेत्रों के लोगों ने इसके लिए सयुक्त रूप से प्रयास किया। श्री गणेश गम्भीर ने चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि हिन्दी की लोकप्रियता के बावजूद उसे राष्ट्र भाषा का दर्जा नहीं मिल पाया जो कि दु:खद है। इस दौरान आयोजित कवि गोष्ठी में नगर के अनेक वरिष्ट कवियों ने अपनी वैचारिक रचनाओं से श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। कवि गोष्ठी का शुभारंभ पूजा यादव की सरस्वती वन्दना से हुआ। गणेश गम्भीर ने सुनाया-‘समरसता-सद्भाव का, देती है संदेश। एक सूत्र में बाँधती, हिन्दी पूरा देश।। लल्लू तिवारी ने सुनाया- ‘प्यार पाने में वक्त लगता है, घर बनाने में वक्त लगता है। वक्त आएगा इन्तजार करो, वक्त आने में वक्त लगता है।। भोलानाथ कुशवाहा ने सुनाया- ‘रोशनी बहुत है रास्ते में मेरे, क्या करूँ पैर मेरा फिसलता है।’ केदार नाथ सविता ने सुनाया- ‘फूल और डाल का साथ बस माली के आने तक है। तट और नाव का साथ बस माझी के आने तक है। अच्छा है हम न करें किसी तरह केे वादे। तुम्हारा और मेरा साथ बस मोड़ के आने तक है। श्याम अचल ने सुनाया- ‘ये रामनाम तो सभी मंत्रों का मूल है। अब राम पर विवाद तो करना फिजूल है। कलयुग में रामनाम है आधार मुक्ति का। जपने से नाश पाप का होता समूल है। नन्दिनी वर्मा ने सुनाया- ‘हम सब मिल इस पावन क्षण में, नवप्रभात को नमन करें। अब गई निशा उठ जा प्यारे श्री ओम हरि का स्मरण करें। इला जायसवाल ने सुनाया- ‘हमें एकता के डोर में बाँधती वह तो है हिन्दी। माँ की ममता सी हमें सींचती वह तो है हिन्दी। पूजा यादव ने पढ़ा- ‘है देश बड़ा है व्यक्ति नहीं, है सबकी अभिव्यक्ति यही। हिन्दी का अविरल मान रहे, हिन्दी भाषा का ज्ञान रहे। कार्यक्रम के आयोजक अनुज श्रीवास्तव ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सर्वश्री जयकुमार, मोनिका, उमेश चन्द मालवीय, हर्ष सिंह राठौर, विमल कुमार, महफूज अली, प्रीति पांडेय, चाँदनी, शैलेंद्र सिंह आदि उपस्थित रहे।