राम मंदिर चढ़ावा चोरी: 105 घटनाओं के बाद भी बड़े आरोपी क्यों बचे? कांग्रेस ने उठाए सवाल

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: 105 घटनाओं के बाद भी बड़े आरोपी क्यों बचे? कांग्रेस ने उठाए सवाल

नई दिल्ली । कांग्रेस ने अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के प्रकरण को लेकर मंगलवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की शह पर मामले को रफा-दफा करने की साजिश रची जा रही है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इस साजिश को सफल नहीं होने देंगे। रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने आठ लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल होने और विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच पूरी होने की जानकारी देकर जवाबदेही से पल्ला झाड़ लिया है, जबकि कई महत्वपूर्ण सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच में उन वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका की समुचित पड़ताल नहीं की गई, जिनके जिम्मे मंदिर के चढ़ावे की सुरक्षा, गिनती, हिसाब-किताब और निगरानी की जिम्मेदारी थी। 

कांग्रेस ने उठाए सवाल

कांग्रेस महासचिव ने सवाल किया, ”क्या आठ लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर देना ही पूरे मामले की जांच है? बाकी बड़े गुनहगार आरोपी क्यों नहीं बनाए गए?” उन्होंने दावा किया कि 45 दिनों के दौरान चोरी की 105 घटनाएं सीसीटीवी कैमरों में दर्ज हुईं और करीब 79.85 लाख रुपये की बरामदगी की खबर है। रमेश ने कहा, ”105 सीसीटीवी घटनाओं और करीब 79.85 लाख रुपये की बरामदगी के बाद क्या सरकार की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है?” उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या केवल 105 घटनाओं के सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध हैं और बाकी फुटेज कहां हैं? कांग्रेस नेता ने राम मंदिर ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चम्पत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को गवाह बनाए जाने पर भी सवाल उठाए। 

उन्होंने कहा कि गवाह और दोषी होने में बड़ा अंतर है, लेकिन जिन लोगों के अधीन पूरी व्यवस्था काम कर रही थी, उनकी प्रशासनिक जिम्मेदारी और घटनाओं के समय उनकी भूमिका की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए थी। रमेश ने बीते चार जून को 2.25 लाख रुपये की नकदी मिलने का वीडियो तत्कालीन महासचिव चम्पत राय तक पहुंचने और पांच जून को उन्हें सीसीटीवी फुटेज दिखाए जाने का उल्लेख करते हुए पूछा कि प्राथमिकी 25 जून को क्यों दर्ज की गई। उन्होंने कहा, ”इन 21 दिनों में क्या हुआ? किसने कार्रवाई रोकने या टालने का फैसला किया?” रमेश ने 2020 की ऑडिट रिपोर्ट और बाद की ऑडिट रिपोर्ट में दान के रिकॉर्ड तथा वित्तीय नियंत्रण को लेकर उठाई गई आपत्तियों का भी उल्लेख किया। 

स्वतंत्र जांच की जरूरत को नजरअंदाज किया

उनके मुताबिक, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग की अवधि 45 दिन होने और 180 दिन का बैकअप रखने की सिफारिश लागू नहीं किए जाने पर भी सवाल उठते हैं। उन्होंने सवाल किया कि पहले से चेतावनी मिलने के बावजूद व्यवस्था दुरुस्त क्यों नहीं की गई और क्या किसी वरिष्ठ अधिकारी की जिम्मेदारी तय हुई। कांग्रेस महासचिव ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी की जांच को पूर्ण बताकर पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की जरूरत को नजरअंदाज किया। उन्होंने कहा कि एसआईटी राज्य सरकार की पुलिस एजेंसी है और ऐसे गंभीर मामले में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच होनी चाहिए। रमेश ने यह भी कहा कि दो नवंबर को उत्तर प्रदेश सरकार ने उच्चतम न्यायालय में जांच पूरी होने और आरोपपत्र दाखिल किए जाने की जानकारी दी थी तथा शीर्ष अदालत ने याचिकाओं का निस्तारण करते हुए आरोपों के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी और याचिकाकर्ताओं को मजिस्ट्रेट की सहायता करने की अनुमति दी। 

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