विश्वनाथ इकाई की काव्य गोष्ठी संपन्न

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विश्वनाथl आज शाम 5.00 बजे शहर समता महिला काव्य मंच की मासिक काव्य गोष्ठी सैयदा आनोवारा खातून ने सरस्वती की मूर्ती पर माल्यार्पण और द्वीप प्रज्वलन के साथ शुभा रंभ किया।संजोजन और संचालन सैयदा आनोवारा खातुन ने की और अनिता पंडा ने एक सुंदर सरस्वती वंदना की प्रस्तुति दी। आज मंच पर उपस्थित थे मुख्य अतिथि के रुप में कानपुर इकाई की समाज सेविका, वरिष्ठ लेखिका, कवियत्री अन्नपूर्णा बाजपेयी , विशिष्ट अतिथि के रुप में जाक़ीर हुसैन ‘बेलम’जी मुख्य वक्ता के रूप में ‘शहर समता’अखबार के सम्पादक उमेश श्रीवास्तव , मेघालय (शिलांग) से वरिष्ठ लेखिका,कवियत्री, शिक्षाविद, डॉ अनिता पांडा , विश्व नाथ चारिआलि असम से लेखिका,कवियत्री, शिक्षिका मनीषा पाल , बंगाईगांव से युवा कवि, हिंदी सेवी मानव दे, विश्व नाथ चारिआलि ( असम) से हिंदी सेवी शिक्षक,लेखक संतोष कुमार महतों औरनिकुमणी शईकिया उपस्थित थे । शहर समता महिला काव्य मंच विश्व नाथ इकाई (असम)की जिलाध्यक्षा सैयदा आनोवारा की संजोजन और संचालन में आज के काव्य मंच सफलता पूर्वक सम्पन्न हुई। मंच पर उपस्थित सभी साहित्य प्रमीओ ने अपनी अपनी सुंदर सुंदर कविताओं से मंच पर चार चांद लगा दिए -चाहे वह अनिता पंडा जी की -“मैं अपनी जिंदगी को खत लिख रही हूं” या मनीष पाल की- “मैंनै श्रृंगार किया था नारी की आभूषण लज्जा से”चाहे वह अन्नपूर्णा बाजपेयी जी की-” मेरी नव गीत की पंक्तियां भूले बिसरे यादों को- या”जाकीर हुसैन जी के- “मैं सडक हूं पथरीली सोने में दिल है दर्द मैं किसे सुनाऊं”-मानव के-“जब मुझको कोई जाना नही”उमेश श्रीवास्तव जी के- आरी अमरते बिरहा अग्नि के ज्वालाओ से तन मन जैसे खो जाता है”आनोवारा खातुन जी की नारी पल कविता जैसे- ” हां अब तो सवल हो गई है नारियां” आज काव्य मंच पर उपस्थित सभी महानुभावो को धन्यवाद ज्ञापन मानव दे ने किया ।