रज्जू भैया विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में ‘लघुकथा लेखन प्रतियोगिता’ का आयोजन,हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत विद्यार्थियों ने दिखाई सृजनात्मक प्रतिभा

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रज्जू भैया विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में ‘लघुकथा लेखन प्रतियोगिता’ का आयोजन,हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत विद्यार्थियों ने दिखाई सृजनात्मक प्रतिभा

शहर समता न्यूज़

प्रयागराज। प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में हिंदी पखवाड़ा के अंतर्गत 22 सितंबर 2026 को ‘लघुकथा लेखन प्रतियोगिता’ का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने उत्साह एवं उमंग के साथ प्रतिभाग किया और अपनी मौलिक लघुकथाओं के माध्यम से रचनात्मक प्रतिभा, कल्पनाशीलता तथा समकालीन जीवन के प्रति अपनी संवेदनशील दृष्टि का परिचय दिया। विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता ने कार्यक्रम को जीवंत एवं सार्थक बना दिया।

हिंदी विभाग के अध्यक्ष एवं अधिष्ठाता, कला संकाय प्रो. आशुतोष कुमार सिंह के मार्गदर्शन एवं समन्वय में आयोजित इस प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में हिंदी भाषा के प्रति अनुराग उत्पन्न करने के साथ-साथ उनकी सृजनात्मक क्षमता, मौलिक चिंतन, अभिव्यक्ति-कौशल और साहित्यिक संवेदना को विकसित करना रहा। विभाग द्वारा हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत विभिन्न रचनात्मक एवं साहित्यिक गतिविधियों का आयोजन विद्यार्थियों को हिंदी के साथ सक्रिय रूप से जोड़ने और उन्हें अपनी प्रतिभा के प्रदर्शन के लिए मंच उपलब्ध कराने की दृष्टि से किया जा रहा है।

प्रतियोगिता के संयोजक डॉ. अलका मिश्रा एवं डॉ. अजीत सिंह रहे, जबकि डॉ. बबलू यादव एवं शोधार्थी अमित कुमार यादव ने सह-संयोजक के रूप में आयोजन को व्यवस्थित रूप से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आयोजन से पूर्व विद्यार्थियों को प्रतियोगिता की रूपरेखा, लघुकथा की विधागत विशेषताओं तथा लेखन में मौलिकता और सृजनात्मकता के महत्व को अवगत कराया।
लघुकथा हिंदी साहित्य की ऐसी महत्वपूर्ण विधा है, जिसमें सीमित शब्दों में जीवन के किसी विशेष प्रसंग, सामाजिक स्थिति, मानवीय संवेदना अथवा विडंबना को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया जाता है। अपने संक्षिप्त कलेवर के बावजूद लघुकथा पाठक के समक्ष व्यापक जीवन-संदर्भ उपस्थित करने की क्षमता रखती है। समकालीन समय की तीव्र गति और बदलते सामाजिक परिवेश में लघुकथा की प्रासंगिकता और भी बढ़ी है।

इसी साहित्यिक एवं शैक्षिक दृष्टि को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों को लघुकथा लेखन के माध्यम से अपने आसपास के जीवन और समाज को देखने तथा उसे रचनात्मक अभिव्यक्ति देने का अवसर प्रदान किया गया। प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों को केवल लेखन के लिए प्रेरित नहीं किया, बल्कि उन्हें अपने अनुभवों, संवेदनाओं और सामाजिक सरोकारों पर विचार करन का मौका मिला।
प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने वाले विद्यार्थियों ने विभिन्न विषयों और जीवन-संदर्भों को अपनी लघुकथाओं का आधार बनाया। उनकी रचनाओं में मानवीय संबंधों, पारिवारिक जीवन, सामाजिक परिवर्तन, संवेदना, संघर्ष, युवा मन, बदलते जीवन-मूल्यों और समकालीन समाज की विभिन्न परिस्थितियों की झलक दिखाई दी। विद्यार्थियों ने कम शब्दों में अपनी बात प्रभावशाली ढंग से कहने का प्रयास किया।

कई प्रतिभागियों की रचनाओं में सामाजिक यथार्थ के प्रति सजग दृष्टि दिखाई दी, वहीं कुछ रचनाओं में मानवीय संवेदनाओं और संबंधों की सूक्ष्म पड़ताल देखने को मिली। विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाशीलता और अनुभव के आधार पर ऐसे प्रसंगों को कथा का रूप दिया, जो सामान्य जीवन में हमारे आसपास घटित होते रहते हैं, लेकिन प्रायः उन पर हमारा ध्यान नहीं जाता।प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को यह अवसर मिला कि वे केवल पाठ्यक्रम की निर्धारित सामग्री तक सीमित न रहते हुए स्वयं भी रचना करें और अपनी भाषा तथा अभिव्यक्ति की क्षमता को विकसित करें। इस प्रकार की गतिविधियाँ विद्यार्थियों में आत्मविश्वास उत्पन्न करने के साथ-साथ उन्हें साहित्य की सृजनात्मक दुनिया से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता ने उत्साह वर्धन किया।

प्रतियोगिता में विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। विद्यार्थियों ने पूरे मनोयोग से अपनी लघुकथाओं का लेखन किया। उनके बीच लेखन को लेकर उत्साह और स्वस्थ रचनात्मक प्रतिस्पर्धा का वातावरण रहा। प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों को एक-दूसरे की रचनात्मक क्षमताओं से परिचित होने तथा साहित्यिक अभिरुचियों को साझा करने का अवसर भी दिया।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और जीवन को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। लेखन व्यक्ति को अपने आसपास की दुनिया को नए दृष्टिकोण से देखने की दृष्टि प्रदान करता है। विशेष रूप से लघुकथा जैसी विधा विद्यार्थियों को कम शब्दों में प्रभावी और सार्थक अभिव्यक्ति का अभ्यास कराती है।कार्यक्रम का कुशल संचालन किसलय सिंह ने किया। उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए प्रतिभागियों एवं उपस्थित विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। उनके संचालन से कार्यक्रम सुव्यवस्थित एवं प्रभावपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

प्रतियोगिता के दौरान विभाग के शिक्षकों एवं शोधार्थियों ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया और उन्हें रचनात्मक लेखन के लिए प्रोत्साहित किया। आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को यह अनुभव भी प्राप्त हुआ कि साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी उनके व्यक्तित्व एवं अकादमिक विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

कार्यक्रम के अंत में कोमल यादव ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने विभागाध्यक्ष, आयोजन से जुड़े सभी शिक्षकों, शोधार्थियों, प्रतिभागी विद्यार्थियों तथा कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी ने प्रतियोगिता को सार्थक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

शिक्षक एवं शोधार्थियों की रही उपस्थिति

इस अवसर पर संस्कृत विभाग के सहायक आचार्य डॉ. प्रवीण कुमार द्विवेदी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यार्थियों की रचनात्मक गतिविधियों का उत्साहवर्धन किया। उनकी उपस्थिति से विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ा।

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