अनिल विज का ड्रीम प्रोजेक्ट पूरा, अमित शाह ने अंबाला में किया 1857 के शहीदी स्मारक का लोकार्पण

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अनिल विज का ड्रीम प्रोजेक्ट पूरा, अमित शाह ने अंबाला में किया 1857 के शहीदी स्मारक का लोकार्पण

चंडीगढ़ : हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज का वर्षों पुराना सपना आज साकार हो गया। अंबाला छावनी की धरती पर 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के वीर शहीदों की स्मृति में निर्मित भव्य शहीदी स्मारक का केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने लोकार्पण किया। इसके साथ ही अनिल विज के उस संकल्प को राष्ट्रीय पहचान मिली, जिसके तहत उन्होंने आजादी की पहली लड़ाई में योगदान देने वाले गुमनाम क्रांतिकारियों को इतिहास में उचित स्थान दिलाने का बीड़ा उठाया था। अंबाला की धरती पर निर्मित यह स्मारक केवल एक ऐतिहासिक इमारत नहीं, बल्कि अनिल विज के वर्षों के संघर्ष, संकल्प और ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने की प्रतिबद्धता का प्रतीक बनकर सामने आया है। विपक्ष में रहते हुए विधानसभा में इस स्मारक की मांग उठाने से लेकर भाजपा सरकार में इसे भव्य राष्ट्रीय परिसर के रूप में विकसित करवाने तक अनिल विज लगातार इस परियोजना से जुड़े रहे।

करीब 800 करोड़ रुपये की लागत से 22 एकड़ में विकसित इस स्मारक में 1857 की क्रांति की पूरी गाथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत की गई है। 23 आधुनिक गैलरियों, 360 डिग्री प्रोजेक्शन, डिजिटल प्रस्तुतियों और 63 मीटर ऊंचे कमलनुमा टावर के जरिए दर्शक आजादी की पहली लड़ाई के ऐतिहासिक घटनाक्रमों को करीब से समझ सकेंगे।

विपक्ष में रहते हुए उठाई थी मांग, सरकार में आने के बाद कराया सपना साकार
अनिल विज का मानना रहा है कि 1857 की क्रांति में अंबाला की भूमिका को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलनी चाहिए। अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष करने वाले हजारों वीरों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया, लेकिन उनमें से अनेक क्रांतिकारियों के नाम इतिहास की पुस्तकों में पर्याप्त स्थान नहीं पा सके। अंबाला छावनी के विधायक के रूप में अनिल विज ने विपक्ष में रहते हुए भी हरियाणा विधानसभा में कई बार इस विषय को उठाया। उन्होंने मांग की कि 1857 के शहीदों की स्मृति में ऐसा राष्ट्रीय स्मारक बनाया जाए, जहां आने वाली पीढ़ियां उनके बलिदान और संघर्ष को समझ सकें। वर्ष 2014 में भाजपा सरकार बनने के बाद अनिल विज ने इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए। उनके संकल्प को सरकार का सहयोग मिला और धीरे-धीरे यह विचार एक विशाल ऐतिहासिक परिसर के रूप में विकसित हुआ। आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हाथों स्मारक का लोकार्पण होना अनिल विज के लंबे प्रयासों की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

1857 की क्रांति को जीवंत करेगी आधुनिक तकनीक
ग्रैंड ट्रंक रोड पर स्थित यह स्मारक 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम को समर्पित है। इसकी विशेषता यह है कि यहां इतिहास को केवल तस्वीरों और दस्तावेजों के माध्यम से नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक के जरिए प्रस्तुत किया गया है। स्मारक में ऑगमेंटेड रियलिटी, वर्चुअल रियलिटी, डिजिटल प्रोजेक्शन, सेंसर आधारित इंटरैक्टिव तकनीक और इमर्सिव प्रस्तुतियों का इस्तेमाल किया गया है। दर्शकों की ऐतिहासिक यात्रा अंबाला से शुरू होती है। इसके बाद उन्हें अंग्रेजों के भारत आगमन, उनकी शासन नीतियों, भारतीय सैनिकों में बढ़ते असंतोष, चर्बी वाले कारतूसों के विवाद और क्रांति की तैयारियों से परिचित करवाया जाता है। विशेष 270 डिग्री प्रोजेक्शन एलिवेटर के माध्यम से दर्शकों को इतिहास के अगले पड़ाव तक ले जाया जाता है। लगभग 50 लोगों की क्षमता वाला यह एलिवेटर ध्वनि और दृश्यों के माध्यम से उस दौर की ऐतिहासिक परिस्थितियों को जीवंत करता है।

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