कविता के अधूरेपन में भी अध्यात्म झलकता है- अनवार अब्बास

0
675

रचना सक्सेना के काव्य संग्रह “छंद रचना” का हुआ लोकार्पण एवं काव्यगोष्ठी

प्रयागराज । लोकरंजन प्रकाशन एवं शहर समता विचार मंच के संयुक्त तत्तवावधान में वरिष्ठ कवयित्री रचना सक्सेना के काव्य संग्रह “छंद रचना’ के लोकार्पण का आयोजन संजय सक्सेना के संयोजन में हिन्दुस्तानी एकेडमी के सभागार में मारूफ शाइर अनवार अब्बास नकवी की अध्यक्षता में सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ। इस आयोजन के मुख्य अतिथि रही प्रो. सरोज सिंह एवं प्रो. रवि कुमार मिश्रा तथा विशिष्ट अतिथि रहें डॉ० प्रदीप चित्रांशी एवं डॉ० सविता कुमारी श्रीवास्तव। आयोजन का शुभारंभ माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन से हुआ तत्पश्चात डॉ०मंजू की वाणी वंदना प्रस्तुत की ।
यह आयोजन दो सत्र में किया गया। पहले सत्र में रचना सक्सेना की पुस्तक पर चर्चा परिचर्चा हुई जो कि 14 पौराणिक छंदों पर आधारित है। इस सत्र का संचालन उमेश श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर प्रो सरोज सिंह ने कहा रचना की छंद रचना विशेष है। इस कविता संग्रह में रचना सक्सेना ने कुछ ऐसे छंदो का प्रयोग किया जो करीब हाशिए पर जा चुके है इसके लिए मैं रचना सक्सेना को बहुत बधाई देती हूँ प्रो. रवि मिश्रा ने अपने विचार व्यक्त करते हुऐ कहा कि विस्मृति किये गये छंद को रचना सक्सेना के छंदों नें पुनः काव्य जगत में स्थापित करते हुए उन्हें लोक कल्याण हेतु साहित्य के माध्यम से समाज के बीच में अपनी पुस्तक को प्रस्तुत किया। डॉ सविता कुमारी श्रीवास्तव ने पुस्तक में समाहित छंद पर प्रकाश डालते हुए छंद विधा की चर्चा करते हुए कहा कि यह पुस्तक साहित्य जगत में नया कीर्तिमान स्थापित करेगी। डॉ प्रदीप चित्रांशी जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुऐ कहा कि मुक्त छंद के दौर में छांदस कविता अपने में दुरूह कार्य है लेकिन रचना सक्सेना ने इस दुरूह कार्य को छंद रचना के अन्तर्गत बहुत सिद्ध कर दिया कि यह दुरूह कार्य नही है बल्कि रचना में प्राण फूकने के समान है। अंत में अध्यक्षता करते हुए मारुफ शाइर अनवार अब्बास नकवी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि कविता के अधूरेपन में भी अध्यात्म झलकता है क्योंकि इससे निरन्तर अभ्यास बना रहता है। छंद रचना की रचनाकार रचना सक्सेना के व्यक्तित्व में ऎसा झलकता भी है। उनकी साधना ही चौदह छंदों को रचकर इस बात को प्रमाणित करता है।
दूसरे सत्र में काव्यगोष्ठी हुई जिसका संचालन मनमोहन सिंह तन्हा ने किया जिसमें डाँ वीरेंद्र तिवारी, कविता उपाध्याय, संगीता श्रीवास्तव, प्रेमा राय, धीरेन्द्र सिंह, राम कैलाश पाल प्रयागी, देवी प्रसाद पाण्डेय, के. पी. गिरि, अजय वर्मा साथी, असलम आदिल एस. पी. श्रीवास्तव, केशव सक्सेना, राम लखन शुक्ल,कल्पना वर्मा, शाहीन खुशबू, सुस्मिता सिंह, मिली श्रीवास्तव, शरत चन्द्र श्रीवास्तव, एम. एस. खान, विजय लक्ष्मी विभा, रवि कुमार मिश्र, शिव कुमार तिवारी, शाम्भवी, मीरा सिन्हा, शंभुनाथ श्रीवास्तव, उर्वशी उपाध्याय, राजेन्द्र प्रसाद श्रीवास्तव, अमित, गीता सिंह, जया मोहन, इंदू प्रकाश मिश्र, नमन यादव, रीतू पाण्डेय, यश मालवीय जलज जीतू आदि ने काव्य पाठ किया। इस अवसर पर शिल्पी सक्सेना एवं नेहा सक्सेना ने भी अपनी माँ को हार्दिक बधाईयाँ दी। आभार ज्ञापन संजय सक्सेना ने किया।