“चिराग़ शम्अ दिये का उजाला राम के नाम नई सहर का मुक़द्दस हवाला राम के नाम” – अनवार अब्बास 

प्रयागराज। 17 अक्तूबर , शुक्रवार को को साहित्यिक संस्था ‘उर्दू हिन्दी संगम’ की ओर से “दीपावली मिलन संध्या” के नाम से एक अदबी महफ़िल सजाई गई। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता उस्ताद शाइर जनाब अनवार अब्बास नक़वी साहेब ने की। उन्होंने इस मौक़े पर बोलते हुए कहा कि-तीज त्योहार मानव जीवन में संवेदनाओं, आभास और भावनाओं को संतुलित करते हैं। जिस से समाज संतुलित और संगठित होता है। कार्यक्रम का संचालन शाइरा संगीता ‘सुमन’ ने किया । 

विशेष अतिथि के रूप में डा प्रदीप चित्रांशी जी ने दीपावली त्योहार के महत्व और प्राचीन संदर्भों पर विस्तार से प्रकाश डाला । उनका दोहा—-

रौनक बन त्योहार जब, आए बहुत समीप।

चूल्हे में हलचल दिखे, दरवाज़े पर दीप।।

शाइरा सुनैना त्रिपाठी ने पढ़ा —-

ईद, दीपावली, मीलाद, मुहर्रम वाले, 

एक झंडे के तले एक ही परचम वाले।

अपनी तहज़ीब का उनवान है गंगा जमुनी, 

दामने मुल्क में हम लोग हैं संगम वाले।

शाइर शाहिद अली शाहिद ने कहा—-

 जुनूं वह रंग फिर लाने लगा है,

क़लम से फिर लहू आने लगा है।

शाइरा संगीता ‘सुमन’ ने कहा—

दिया मिट्टी का सोने का उजाला

गुलाबी होता मौसम ठंड वाला

दिलों के आंगनों में रसमसाहट

छलकता आरज़ूओं का पियाला

इनके अलावा जनाब शाहिद इलाहाबादी,जनाब सुनील दानिश,मोहतरमा संगीता सुमन

नवाब जाफ़र अस्करी ने अपनी रचनाएँ पढ़ी। अन्त में जाफर ने आभार व्यक्त किया।