महिला काव्य गोष्ठी विशेषांक | 4 जनवरी 2025

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संपादकीय

काव्य जगत की सुंदर बातें ,
प्रकृति सरोवर की सब रातें ।
कितनी सुंदर लगतीं हैं ,
अर्थ जगत से तोड़-तोड़ कर ।
लिख जाती मनोहरी सांसे ,
इसका क्या है मोल ।
तोल – तोल कर लिख डालो ,
तुम जग की सारी संघातें ।
तो बात हो रही है महिला काव्य गोष्ठी विशेषांक की । सरस भाव से लिखी गई इस विशेषांक की सभी कविताएं भाव- भक्ति – ऋतु की भावनाओं से ओतप्रोत हैं। लगातार काव्य गोष्ठी
का यह सिलसिला शहर समता विचार मंच की सभी रचनाकारों द्वारा कही और लिखी जा रही है । जिसमें से भविष्य में बहुत सी मणियां निकलेंगी , जो समाज और काव्य जगत में अपना निश्चित ही एक मीनार गढ़ेंगी , सरल भाव की सुंदरतम कविताओं से लबरेज इस विशेषांक से कुछ कविताओं की बानगी देखिए
पहली बानगी
अंधियारे मन के कोनों में,
थोड़ी सी रौशनी लाएं,
भूले सपनों की पगडंडी पर,
आओ फिर से दिया जलाएं।
दूसरी बानगी
पहले मनाऊं गणपति भगवान
रिद्धि सिद्धि के संग आएं
शीश नवाऊंगी शारदा मैया
ज्ञान और बुद्धि भंडार अपार!
तीसरी बानगी
मंजिल को पाना है तो, निकल सफर पर,
कङ्गिन होगी राह, कांटों भरी,
पैरों में छाले होंगे,
मगर ये दिन ही तुझे, सँवारने वाले होंगे।।
कविताओं पर आधारित यह महिला काव्य गोष्ठी विशेषांक आपको कैसा लगा, प्रतिक्रिया अवश्य दीजिएगा ।
अंत में-
लिखो तुम लगन से,
मनोभाव मन से ।
मिलेगा बहुत रस,
लिखो तुम अगन से।

  • उमेश श्रीवास्तव